‘मम्मी ने अंकल संग पापा को मार डाला, मैंने कंबल से छिपकर देखा था’..


कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में प्रेमी संग मिलकर पति को जहर देकर मार डालने और बिना किसी को बताए शव का अंतिम संस्कार कर देने के मामले में अपर जिला जज 20 नीलांजना ने पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। घटना के बाद से पत्नी व प्रेमी दोनों जेल में ही बंद हैं।

कानपुर के किदवईनगर के मेडिकल स्टोर संचालक प्रतीक शर्मा की लखनऊ के होटल में 2024 में हत्या के मामले में सात वर्षीय मासूम बेटी ने उन्हें न्याय दिलाया है। बेटी समेत सात गवाहों के बयानों के बाद अपर जिला जज 20 नीलांजना ने प्रतीक की पत्नी नेहा, उसके प्रेमी आयुष शर्मा को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

किदवईनगर वाई ब्लॉक निवासी पुनीत शर्मा के इकलौते बेटे प्रतीक की शादी 2017 में अयोध्या के फतेहगंज निवासी नेहा से हुई थी। उनके दो बच्चे बेटी मान्या और बेटा अभिराज हैं। छह मार्च 2024 को नेहा और प्रतीक बच्चों को साथ लेकर घर से निकले थे। 12 मार्च को नेहा सिर्फ बच्चों के साथ लौटी।

पूछने पर बताया कि प्रतीक की गाड़ी खराब हो गई है वह बाद में आएंगे। 16 मार्च को नेहा दवाई लेने का बहाना बनाकर दोनों बच्चों को साथ लेकर घर से निकली फिर नहीं लौटी। पुनीत ने बेटे, बहू और बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कराई।

पुलिस को जांच में नेहा द्वारा अपने पति के दोस्त (प्रेमी आयुष शर्मा, निवासी नौबस्ता आवास-विकास) के साथ मिलकर उसकी हत्या करने का पता चला। दोनों ने लखनऊ के होटल में शराब में जहर देकर प्रतीक को मारने के बाद वहीं अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने नेहा और आयुष को जेल भेज दिया था। जज ने मासूम, मृतक के पिता, होटल मैनेजर समेत सात गवाहों को सुनने के बाद दोनों को सजा सुनाई।

बेटी ने कंबल के अंदर से छिपकर देखी थी वारदात
कोर्ट में जज के सामने मासूम ने बताया कि मम्मी ने अंकल के साथ मिलकर पापा के पानी में कुछ मिलाया था जिसके बाद वह सो गए और अचानक उनके खरटि बंद हो गए थे। यह सब उसने वारदात की रात कंबल के अंदर से छिपकर देखा था।

मां ने दी थी धमकी, अगर पापा के बारे में पूछा तो काट डालेंगे
प्रतीक की हत्या के बाद नेहा ने बेटी को धमकाया था। कहा था कि सबसे कह देना कि रास्ते में गाड़ी खराब हो गई थी। पापा को आने में चार दिन लगेंगे। तुमने पापा के बारे में पूछा तो काट के बाहर डाल देंगे। मां के इस तरह से धमकी देने की बात बच्ची ने कोर्ट में बताई थी।

बेटी ने बताया था कि हम, पापा-मम्मी और आयुष अंकल लखनऊ के एक होटल में रुके थे। आयुष अंकल भी कानपुर से ही हम लोगों के साथ गए थे। पांच दिन होटल में रुके, कहीं घूमने नहीं गए। अंकल और मम्मी ने पापा को गिलास में कुछ सफेद-सफेद घोलकर पिला दिया। पापा की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें हॉस्पिटल भेज दिया और हम लोग एक दिन होटल में रुके। अगले दिन मम्मी मुझे और भाई को लेकर घर लौट आई।

होटल मैनेजर ने भी की तस्दीक
प्रतीक, नेहा और आयुष लखनऊ के जिस होटल में रुके थे वहां के मैनेजर ने कोर्ट में दिए बयान में बताया कि तीनों लोग एक साथ होटल के कमरा नंबर 205 में रुके थे। प्रतीक ने खुद रजिस्टर में एंट्री की थी। बच्चों की रोने की आवाज सुनकर होटल स्टाफ कमरे पर गया तो पता चला कि प्रतीक की तबीयत खराब है। तब तक एंबुलेंस आ गई थी। नेहा व प्रतीक एंबुलेंस से गए थे जबकि आयुष कार से एंबुलेंस के पीछे गया था।

बाप के लिए जवान बेटे की मौत से बड़ा कोई सदमा नहीं
कोर्ट का फैसला सुनकर प्रतीक के पिता पुनीत कुमार शर्मा की आंखों से आंसू छलक आए। रुधे गले से बोले- कोर्ट से उन्हें इंसाफ मिला है। अब बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। बहू जिसे बेटी मानता था उसी ने मेरे इकलौते बेटे की हत्या कर शव का अंतिम संस्कार तक कर दिया।

आखिरी समय में बेटे को देख भी नहीं सका। एक बाप के लिए जवान बेटे की मौत से बड़ा कोई सदमा नहीं हो सकता। खबर सुनकर तो मेरा भी मर जाने का मन किया लेकिन बेटे को इंसाफ दिलाने और मासूम बच्चों की परवरिश का ख्याल आने पर सबकुछ भूलकर बेटे का न्याय दिलाने में जुट गया। कोर्ट का फैसला सुनने के बाद कलेजे को ठंडक पड़ी।

घटना को याद करते हुए पुनीत ने बताया कि बेटे प्रतीक का गोविंदनगर में मेडिकल स्टोर था। आयुष हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों के पर्चे लेकर मेडिकल स्टोर पर आता था और दवा में कमीशन लेता था। धीरे-धीरे आयुष ने मेलजोल बढ़ाया और घर में भी आने-जाने लगा।

बताया वर्ष 2024 में वारदात से कुछ वक्त पहले एक रिश्तेदार लखनऊ में भर्ती थे तो वह उन्हें देखने गए थे। प्रतीक भी नेहा और बच्चों के साथ गया था। फिर फैजाबाद ससुराल जाने की बात कहकर चला गया। दो-तीन दिन बाद नेहा तो बच्चों संग लौटी लेकिन साथ में प्रतीक नहीं था। बाद में जब पुलिस ने बेटे की हत्या का खुलासा किया तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई।

सजा के समय दिया प्रार्थना पत्र खारिज
एडीजीसी ने बताया कि साक्ष्यों के आधार पर कड़ी दर कड़ी जोड़ी गई क्योंकि गवाह झूठ बोल सकता है लेकिन परिस्थितियां नहीं। कोर्ट ने भी इसे माना। जून 2024 में चार्जशीट दाखिल हुई। अगस्त 2024 में आरोप तय होने के बाद सात गवाह पेश कराए गए और 19 माह में न्यायिक कार्रवाई पूरी कर ली गई।

सजा पर सुनवाई के दौरान नेहा की ओर से एक नए अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य देने के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया लेकिन अभियोजन के विरोध के बाद कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

ऐसे अपराध सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक : कोर्ट
कोर्ट ने कहा- मौजूदा दौर में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं जो सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक हैं क्योंकि पति-पत्नी का रिश्ता केवल विश्वास पर ही आधारित होता है। ऐसे अपराधों से वैवाहिक संबंधों में अविश्वास व भय का माहौल बनता है जो भारतीय सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक है। इस मामले में नेहा ने आयुष के साथ मिलकर प्रतीक की साजिश के तहत हत्या कर शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। अपराध विरल से विरलतम श्रेणी का नहीं लेकिन गंभीर प्रकृति का है इसलिए दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है।

दो वर्ष के दौरान कोर्ट की कार्यवाही
06 मार्च 2024 को घर से निकला। प्रतीक पत्नी और बच्चों संग घर से निकला
10 मार्च 2024 को प्रतीक की होटल में हत्या।
12 मार्च 2024 को नेहा बच्चों संग घर लौटी।
16 मार्च 2024 को नेहा बच्चों संग घर से चली गई।
21 मार्च 2024 को पिता ने दिया गुमशुदगी दर्ज कराई।
16 अप्रैल 2024 को नौबस्ता थाने में दर्ज हुई हत्या की रिपोर्ट।
17 अप्रैल 2024 को नेहा और आयुष गिरफ्तार।
08 जून 2024 को दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
21 अगस्त 2024 को दोनों पर आरोप तय।
13 जनवरी 2026 को दोनों दोषी करार दिए गए।
16 जनवरी को कोर्ट ने दोनों को सजा सुनाई।

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