
Air and Missile Defence System: तेजी से बदलते सामरिक माहौल में हर देश खुद को सुरक्षित करने में जुटा है. यहां तक कि सुपर पावर अमेरिका भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है. यही वजह है कि यूएसए गोल्डन डोम नाम से एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप कर रहा है, जिसकी शुरुआती लागत 175 अरब डॉलर है.
इसके अलावा यूरोप, जापान, चीन जैसे देश भी कटिंग एज टेक्नोलॉजी की मदद से एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम डेवलप कर रहा है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पॉलिसी मेकर्स और डिफेंस डिपार्टमेंट को एक मजूबत और सुदृढ़ एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत महसूस हुई. इसके बाद मिशन सुदर्शन चक्र का ऐलान किया गया, जिसका उद्देश्य देश के हर हिस्से को हवाई हमले से न केवल सुरक्षित रखना है, बल्कि दुश्मन के अटैक को न्यूट्रलाइज करते हुए माकूल जवाब देना भी है.
आकाश-NG और S-400 की फ्लीट भी इसी को देखते हुए तैयार की जा रही है. मीडिया रिपोर्टस की मानें तो भारत मित्र देश रूस से अल्ट्रा मॉडर्न S-500 एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदना चाहता है, ताकि भविष्य में होने वाले स्पेस वॉर से देश की सुरक्षा की जा सके. तमाम उपायों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ऐसा एयर एंड मिसाइल डिफेंस मेकेनिज्म तैयार करने में जुटा है, जिससे 20 किलोमीटर तक के दायरे में बिना बम और गोला चलाए हवाई हमलों को नाकाम किया जा सकेगा. यह हाई-एनर्जी लेजर बेस्ड वेपन सिस्टम है, जिसकी मदद से समय रहते एरियल थ्रेट को न्यूट्रालाइज किया जा सकेगा.
भारत रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाने की ओर बढ़ रहा है. DRDO 300 किलोवाट क्लास के हाई-एनर्जी लेजर (एचईएल) वेपन सिस्टम के डेवलपमेंट के एडवांस स्टेज में प्रवेश कर चुका है. यह प्रणाली हाइब्रिड इलेक्ट्रिकली ड्रिवन गैस लेजर आर्किटेक्चर पर आधारित होगी और इसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हार्ड-किल वेपन के रूप में विकसित किया जा रहा है.
इसके प्रभावी संचालन की सीमा 20 किलोमीटर से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे यह भारत की अगली पीढ़ी की वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों की रणनीतिक श्रेणी में शामिल हो जाएगी. कार्यक्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस लेजर प्रणाली के लिए आवश्यक अधिकांश कोर तकनीकों का पहले ही सफल परीक्षण किया जा चुका है. कई सब-सिस्टम्स या तो पूरी तरह मैच्योर हो चुकी हैं या फिर इंटीग्रेशन के एडवांस स्टेज में हैं.
यह आर्किटेक्चर इलेक्ट्रिकल एनर्जी से ऑपरेट गैस लेजर पर आधारित है, जिसमें बिजली उत्पादन की उच्च दक्षता और गैस लेजर प्रणालियों की बेहतर बीम गुणवत्ता एवं स्केलेबिलिटी को जोड़ा गया है. इससे भविष्य में और अधिक शक्तिशाली लेजर सिस्टम्स के विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा.
