‘वो अपने आप को बचाने के लिए कुछ भी…’, नोएडा में युवराज की मौत के चश्मदीद की मां का छलका दर्द

‘वो अपने आप को बचाने के लिए कुछ भी…’, नोएडा में युवराज की मौत के चश्मदीद की मां का छलका दर्द

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत का मामला अब एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. इस हादसे में चश्मदीद मुनेंद्र और अब उसकी मां के बयान ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुनेंद्र की मां ने खुलकर आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा उन्हें और उनके परिवार को लगातार डराया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. ताकि वो अपने बयान बदल दे.

मुनेंद्र की मां सुनीता ने बताया कि हादसे की रात मुनेंद्र वही शख्स था जिसने सबसे पहले मौके पर पहुंचकर युवराज को बचाने की कोशिश की. कहा कि जो मुनेंद्र ने जो देखा वही मीडिया के सामने सच बताया है. युवराज चिल्ला रहा था और बार-बार यही कह रहा था कि मुझे बचा लो.

’30 मिनट तक ठंडे और गहरे पानी में युवराज को ढूंढता रहा मेरा बेटा’

सुनीता ने बताया कि वो एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं, लेकिन बावजूद इसके उनके बेटे ने अपनी जान के परवाह किए बगैर करीब 30 मिनट तक ठंडे और गहरे पानी में युवराज को खोजने की कोशिश की. पानी बेहद ठंडा था वहां पर कोई रोशनी नहीं थी. इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी. लगातार पुलिस के सामने बार-बार उसे बचाने की कोशिश कर रहा था. सुनीता ने बताया कि घटना के अगले दिन उसके बेटे को पुलिस अपने साथ ले गई. उसके साथ करीब 5 घंटे तक पूछताछ की. फिर उसे यह कह कर छोड़ दिया कि किसी के सामने कोई भी सच बात मत बताना. सुनीता बोलीं- लेकिन मेरे बेटे ने इंसानियत दिखाते हुए उस रात जो देखा सब कुछ मीडिया के सामने सच बता दिया. जब उसने शासन प्रशासन और पुलिस की पोल खोली तो पुलिस ने उससे कहा कि अपना बयान बदल दो लेकिन वह लगातार सच बोलता रहा.

बिल्डर की गिरफ्तारी के बाद बड़ा डर

मुनेंद्र की मां ने बताया इस पूरी घटना में बिल्डर की गिरफ्तारी के बाद मुनेंद्र को इस बात का डर है कि कहीं बिल्डर उसके खिलाफ कोई गलत कदम ना उठा ले. उसकी मां ने कहा कि ऐसे लोग जो पहले से ही लापरवाह हैं, अपने को बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

एक मौत एक गवाह और सिस्टम की सच्चाई

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने जहां एक परिवार को उजाड़ दिया. वहीं घटना का गवाह खुद डर और दबाव की साए में जी रहा है. अब देखना ये होगा की जांच एजेंसियां इन आरोपों को कितने गंभीरता से लेती हैं. क्या सच में सच्चाई सामने आ पाएगी या फिर यह मामला फिर से दब जाएगा?

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