
हर तरफ, हर जगह बेशुमार गाड़ियां। बम्पर से बम्पर एक-दूसरे पर हावी होती कारें, चीखते हॉर्न की आवाजें और जब पहिए थम जाते हैं तो इस ट्रैफिक में फंसे लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। जी हां यही आलम है आज हमारे बड़े शहरों का जहां सड़कें सिर्फ गाड़ियों से नहीं भरीं बल्कि लोगों के सब्र, सांस और सुकून से भी जाम हो चुकी हैं। आज हिंदुस्तान के महानगरों में सुबह घर से निकलने वाला इंसान, शाम को सिर्फ थका हुआ नहीं लौटता वो लौटता है गुस्से में, घबराहट में और टूटे हुए दिल के साथ। तेज रफ़्तार ज़िंदगी में हर दिन लाखों लोग अपनी सबसे क़ीमती वक़्त एक-एक, दो-दो घंटे ट्रैफिक में गंवा रहे हैं। इंजन चालू, खिड़कियां बंद, धुआं नाक के जरिए शरीर के अंदर, हॉर्न और गाड़ियों का शोर कानों में और दिमाग लगातार अलर्ट मोड में ना चलना, ना हिलना, सिर्फ बैठना। मेडिकल साइंस कहती है लंबे समय तक यूं बैठे रहना और जहरीली हवा में सांस लेना हार्ट के लिए सबसे खतरनाक कॉम्बिनेशन है।
बिल्कुल जो इंसान के स्वभाव को भी बदल रहा है चिड़चिड़ापन, बेचैनी, जल्दी गुस्सा, नींद की कमी। यही स्ट्रेस धीरे-धीरे ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। हार्ट बीट अनियमित करता है और दिल पर ऐसा दबाव डालता है जिसका एहसास तब होता है। जब बहुत देर हो चुकी होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स जिसे Silent Cardiac Stress कहते हैं। यानि ट्रैफिक जाम का असर सीधे दिल पर पड़ता है। एक तरफ जहरीली हवा जो खून में जाकर नसों को सख्त बनाती है। दूसरी तरफ लगातार शोर और टेंशन ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और ऊपर से शरीर की हरकत बंद। यही वजह है कि आज हार्ट अटैक सिर्फ 60 की बीमारी नहीं रहा। 30, 35, 40 की उम्र में दिल अचानक जवाब दे रहा है।
सोचिए जरा आप रोज ट्रैफिक में फंस कर अपनी जिंदगी के वो बेशकीमती घंटे खो रहे हैं जो आप अपने परिवार के साथ बिता सकते थे या अपने दिल को मजबूत बनाने में लगा सकते थे। ये मुमकिन नहीं है कि अचानक कल से सड़कें खाली हो जाएंगी कोई ये भी नहीं कह सकता कि ट्रैफिक सिस्टम अचानक सुधर जाएगा। लेकिन जो बात तय है वो ये कि दिल का ख्याल रखना आपके कंट्रोल में है। मतलब ये कि जाम में फंसना भले आपकी मजबूरी हो लेकिन ऐसे हालात में अपने दिल को कैसे काबू में रखना है ,दिमाग़ को कैसे शांत रखना है। गाड़ी में बैठकर भी सांसों पर कंट्रोल कैसे रखना है ये सीखना बेहद ज़रूरी है। ऐसे में स्वामी रामदेव से जानेंगे दिल की सेहत का ध्यान कैसे रखा जाए।
ठंड में क्या होता है दिल के साथ ?
नसें सिकुड़ती हैं।
ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
दिल पर ज्यादा दबाव।
हाई BP के मामले 25% तक बढ़ जाते हैं।
सर्दियों में हार्ट अटैक क्यों बढ़ते हैं ?
सर्दियों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से जैविक (Biological) और जीवनशैली से जुड़े कारण होते हैं। चिकित्सा शोधों के अनुसार, ठंड के मौसम में दिल के दौरे का खतरा लगभग 30% से 50% तक बढ़ जाता है। जब शरीर ठंडी हवा के संपर्क में आता है, तो शरीर की गर्मी को बचाने के लिए रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) और नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसे ‘वैसोकॉन्स्ट्रिक्शन’ कहते हैं। नसों के संकरा होने के कारण हृदय को शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए सामान्य से अधिक जोर लगाना पड़ता है। हृदय की मांसपेशियों पर ज्यादा दवाब पैदा होता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। सुबह का वक्त सबसे ज्यादा रिस्की होता है। अस्पतालों की इमरजेंसी में बढ़ोतरी भी देखी जाती है।
खतरे में दिल
हाई बीपी
हाई शुगर
हाई कोलेस्ट्रॉल
चेस्ट पेन
पसीना आना
कार्डियक अरेस्ट से कैसे बचें
लाइफ स्टाइल में सुधार करें।
तंबाकू-एल्कोहल की आदत छोड़ें।
जंक फूड की बजाय हेल्दी फूड खाएं।
रोज योगाभ्यास प्राणायाम करें।
वॉकिंग-जॉगिंग साइकिलिंग करें।
स्ट्रेस लेने के बजाय प्रॉब्लम शेयर करें।
दिल ना दे धोखा, चेकअप जरूरी
ब्लड प्रेशर महीने में एकबार चेक करें।
कोलेस्ट्रॉल 6 महीने पर चेक करवाते रहें।
ब्लड शुगर 3 महीने पर चेक करवाएं।
EYE टेस्ट 6 महीने पर करवाएं।
फुल बॉडी साल में एकबार चेक करवाएं।
दिल को हेल्दी रखने के लिए कंट्रोल करें ये चीजें
ब्लड प्रेशर।
कोलेस्ट्रॉल।
शुगर लेवल।
बॉडी वेट।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
