
SP family politics: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक बार फिर बड़े विवाद को लेकर चर्चा में आ गए हैं। लेकिन, इस बार यह विवाद सियासी नहीं, बल्कि उनका पारिवारिक विवाद। इस बार मामला उनके सौतेले भाई प्रतीक यादव और भाभी अर्पणा यादव से जुड़ा है, जिसने न केवल यादव परिवार की अंदरूनी खटास को सामने उजागर कर दिया है, बल्कि समाजवादी पार्टी और महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब, हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव के अपनी पत्नी को लेकर किये गए एक विवादित पोस्ट ने इस पूरे विवाद को हवा दी है।
प्रतीक यादव का पोस्ट
दरअसल, प्रतीक यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर अर्पणा यादव की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें ‘फैमिली डिस्ट्रॉयर’ तक बता दिया। पोस्ट में उन्होंने खुलेआम यह लिखा कि अर्पणा यादव ने उनकी और उनके परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी है और अब वह उनसे बहुत जल्द तलाक लेने जा रहे हैं। यह पोस्ट कुछ ही देर में वायरल हो गई और राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बड़ा हड़कंप मच गया।
यादव परिवार की पृष्ठभूमि और विवाद की ‘जड़’
बता दे, प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे हैं, जबकि अखिलेश यादव पहली पत्नी मालती देवी के बेटे हैं। मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से प्रतीक यादव को अपना बेटा स्वीकार किया था, लेकिन राजनीतिक उत्तराधिकार अखिलेश यादव को सौंपा गया। बस… यहीं से परिवार के अंदर संतुलन हमेशा के लिए नाजुक बन गया।
अर्पणा यादव और प्रतीक यादव की शादी साल 2011-12 के आसपास हुई थी। अर्पणा यादव राजनीति में काफी सक्रिय रहीं, जबकि प्रतीक यादव अपने व्यवसाय से जुड़े रहे। अर्पणा यादव ने समाजवादी पार्टी से राजनीति की शुरुआत की और साल 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
सपा से भाजपा तक का सफर
साल 2016 में आरक्षण को लेकर दिए गए अर्पणा यादव के एक बयान ने उन्हें विवादों में ला दिया था। इसके बाद साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी तस्वीरें सामने आईं, जिसने समाजवादी पार्टी के अंदर भयंकर रूप से असहजता पैदा की। फिर, साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अर्पणा यादव ने सपा से टिकट की मांग की, लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें अपना स्टार प्रचारक बनाया और फिलहाल वह उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।
यहीं से विवाद में नया मोड़ आ गया। अब प्रतीक यादव के हालिया पोस्ट के बाद यह सवाल खड़े होने लगे कि क्या अर्पणा यादव का भाजपा में जाना ही इस पारिवारिक टकराव की असली कारण है?
सोशल मीडिया पोस्ट और ‘हैक’ की दलील
प्रतीक यादव का विवादित पोस्ट के वायरल होने के बाद अर्पणा यादव के भाई ने दावा किया कि प्रतीक यादव का सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था। हालांकि, इससे पहले भी प्रतीक यादव अर्पणा यादव के खिलाफ कई बार पोस्ट कर चुके हैं, जिन्हें बाद में डिलीट कर दिया गया। ऐसे में ‘हैक’ की दलील पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण बनाम पारिवारिक राजनीति
इस पूरे विवाद ने समाजवादी पार्टी के महिला सशक्तिकरण के दावों को अब कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि जब डिंपल यादव राजनीति में सक्रिय रहकर संसद तक पहुंच चुकी हैं, तो अर्पणा यादव के साथ अलग व्यवहार क्यों? क्या पार्टी के अंदर परिवार की महिलाओं के लिए भी अलग-अलग पैमाने हैं?
इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल निजी नहीं, बल्कि पूर्ण रूप स राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा को जहां इससे सपा पर हमला करने का मौका मिल गया है, वहीं अखिलेश यादव और डिंपल यादव की छवि पर भी प्रभाव पड़ता साफ़ नज़र आ रहा है।
अब आगे क्या?
फिलहाल, अभी तक न तो प्रतीक यादव और न ही अर्पणा यादव की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। अखिलेश यादव भी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन इतना तय है कि यह विवाद आगामी कुछ ही दिनों में सपा की राजनीति और यादव परिवार की एकता दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। अब देखना यह होगा कि यह पारिवारिक कलह यहीं थमती है या उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा करती है।
