इंजीनियर मौत: नोएडा प्राधिकरण ने SIT को सौंपी 60 पन्नों की रिपोर्ट, जानें वो 7 प्वाइंट

इंजीनियर मौत: नोएडा प्राधिकरण ने SIT को सौंपी 60 पन्नों की रिपोर्ट, जानें वो 7 प्वाइंट

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में नोएडा ऑथोरिटी ने SIT को 7 बिंदुओं पर 60 से ज्यादा पन्नों का जवाब सौंपा है. इसके साथ ही डिजास्टर मैनेजमेंट रिपोर्ट भी एसआईटी को उपलब्ध कराई गई. अब एसआईटी इन दस्तावेजों का एनालिसिस करेगी. इसके बाद 24 जनवरी को रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी. ऐसा माना जा रहा है कि रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक स्तर पर जल्दी बदलाव हो सकते हैं.

इस घटना को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत जिला प्रशासन, पुलिस और प्राधिकरण तीनों का बड़ा फैलियर है. एसआईटी भी रिपोर्ट के मुताबिक जिम्मेदारी तय करेगी. सूत्रों के मुताबिक SIT ने शुरुआती फैक्ट फाइंडिंग CM योगी को मौखिक रूप से दी. अगले दो दिनों में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है.

नोएडा इंजीनियर की मौत पर सवाल

नोएडा प्राधिकरण ने युवराज मेहता हादसे के मामले में एसआईटी को सात प्रमुख बिंदुओं पर अपना जवाब सौंप दिया. युवराज की कार डूबने वाली घटना से जुड़े स्पोर्ट्स सिटी के 21 प्लॉटों के आवंटन, ओसी व सीसी कब जारी की गईं और उनकी क्या शर्तें थीं, इसकी जानकारी दी गई. साथ ही साइट पर सड़क, सड़क सुरक्षा उपाय, पानी-सीवर जैसी यूटिलिटी सुविधाएं कब उपलब्ध कराई गईं और पजेशन कब सौंपा गया, यह भी बताया गया. घटना से पहले एक ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने पर क्या कार्रवाई हुई और युवराज हादसे के बाद तत्काल क्या एक्शन लिया गया, इन बिंदुओं पर भी जवाब मांगे गए थे.

गड्ढे में कार समेत गिरने से मौत

एनजीटी सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रही थी. नोएडा के सेक्टर-150 में एक वाणिज्यिक स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में कार समेत गिरने से मेहता की मौत हो गई थी. एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने उस खबर पर गौर किया, जिसमें कहा गया है, कोहरे के कारण मेहता ने कार अचानक दाईं दिशा में मोड़ी, जिससे वह पानी से भरे गड्ढे में गिर गई.

जहां युवराज की मौत हुई, उसे शुरू में एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन पिछले एक दशक से बारिश के पानी और आसपास की हाउसिंग सोसाइटी से निकलने वाले अपशिष्ट जल के जमा होने के कारण यह तालाब में तब्दील हो गई थी. पीठ ने यह भी संज्ञान लिया कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से 2015 में तैयार की गई वर्षा जल प्रबंधन योजना कई दौर के सर्वेक्षणों और स्थल निरीक्षणों के बावजूद केवल कागजों पर सिमटकर रह गई.

एनजीटी ने जलभराव की समस्या पर नोएडा प्राधिकरण की कथित निष्क्रियता को लेकर स्थानीय निवासियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी गौर किया. अधिकरण ने कहा कि खबर नोएडा प्राधिकरण की ओर से सुधारात्मक उपाय करने में बरती गई खामियों की ओर इशारा करती है, जिसके कारण व्यक्ति की मौत हुई. यह मामला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन का संकेत देता है और पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाता है.

एनजीटी ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव और गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी को पक्षकार बनाया है. अधिकरण ने प्रतिवादियों को 10 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक हफ्ते पहले हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

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