
Aging Health: बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई समस्याएं होने लगती हैं. इन्हीं में से एक गंभीर लेकिन कम पहचानी जाने वाली समस्या ‘सरकोपीनिया’ है. ये बीमारी धीरे-धीरे बॉडी की मस्लस को कमजोर कर देती है, जिससे चलना-फिरना और रोजमर्रा के काम मुश्किल हो सकते हैं. ऐसे में इस खबर में हम आपको इस समस्या के बारे में डिटेल में बताएंगे…
क्या है सरकोपीनिया?
सरकोपीनिया उम्र से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें बढ़ती उम्र के साथ मसल्स की ताकत और साइज कम होने लगते हैं. आमतौर पर ये समस्या 40 साल के बाद शुरू हो सकती है और 60 साल के बाद तेजी से बढ़ती है. इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जैसे फिजिकल एक्टिविटी की कमी, प्रोटीन से भरपूर डाइट न लेना, हार्मोन में बदलाव, लंबे समय तक बीमार रहने के कारण, डायबिटीज जैसे पुरानी बीमारी या शरीर में सूजन के कारण, शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलने पर. इन कारणों के कारण मसल्स धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं.
सरकोपीनिया के शुरुआती लक्षण
सरकोपीनिया के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं. इसके शुरुआती लक्षण हाथ-पैरों में कमोजीर महसूस होना, सीढ़ियां चढ़ने या कुर्सी से उठने में परेशानी होना, बैलेंस बिगड़ना और बार-बार गिरने का डर होना, जल्दी थकान महसूस होना, वजन कम होना हैं. हालांकि समय रहने इन लक्षणों को पहचानने से कंडीशन को सुधारा जा सकता है.
सरकोपीनिया का इलाज
सरकोपीनिया का इलाज संभव है, खासकर अगर इसे जल्दी पहचान लिया जाए. हालांकि इससे बचाव के लिए रोजाना स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हल्की एक्सरसाइज करना चाहिए, इससे मसल्स मजबूत होते हैं. साथ ही प्रोटीन, विटामिन D और कैल्शियम जैसे बैलेंस्ड डाइट लेना चाहिे. वहीं पार्यप्त नींद, धूम्रापन से दूरी और एक्टिव लाइफस्टाइल मददगार होती है. लेकिन जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
