भ्रम फैलाया जा रहा…UGC नियमों के विरोध में उतरे करन भूषण, बोले- समिति का कोई लेना देना नहीं

भ्रम फैलाया जा रहा…UGC नियमों के विरोध में उतरे करन भूषण, बोले- समिति का कोई लेना देना नहीं

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता बृजभूषण सिंह बुधवार को नए यूजीसी नियमों के खिलाफ खुलकर सामने आए और उन्होंने समाज में जाति आधारित बैर रोकने के लिए इस पर पुनर्विचार की मांग की. कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद की जिस स्थायी समिति के वह सदस्य हैं, उस समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सोशल मीडिया और समाचार चैनलों के माध्यम से मीडिया के एक धड़े द्वारा यूजीसी के नए नियम को लेकर मेरे खिलाफ अनेक भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं. बिना मेरा पक्ष जाने, ऐसा अभियान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

‘इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं’

करण भूषण सिंह ने लिखा, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संसद की जिस स्थायी समिति का मैं सदस्य हूं, उस समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है. उन्होंने लिखा कि मेरी भावनाएं हमारे समाज के लोगों के साथ हैं और मेरी मांग है कि यूजीसी अपने इस नियम पर पुनर्विचार करते हुए जनभावना का सम्मान करे और इसमें आवश्यक सुधार लेकर आए जिससे समाज में जाति आधारित किसी प्रकार की वैमनस्यता ना फैलने पाए. उन्होंने कहा कि हम अपने शिक्षण संस्थानों को जातिगत युद्ध का केंद्र नहीं बनने दे सकते हैं. हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं.

युद्ध का मैदान नहीं बनने देंगे

करन भूषण ने कहा कि हम अपने शिक्षण संस्थाओं को जातिगत युद्ध का केंद्र बनने नहीं दे सकते हैं. हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं. सोशल मीडिया एवं समाचार चैनल के माध्यम से मीडिया के एक धड़े द्वारा यूजीसी के नए नियम को लेकर मेरे विरुद्ध कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रहीं हैं. बिना मेरा पक्ष जाने ऐसा कैंपेन चलाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

प्रतीक भूषण सिंह क्या बोले?

वहीं, बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने अपने भाई सांसद करण भूषण सिंह के पोस्ट पर कहा कि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उस समिति की बैठक में उपस्थित नहीं हुए थे और न ही उन्होंने कहीं हस्ताक्षर किए हैं. ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया जिससे समाज में विभाजन उत्पन्न हो. इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के मसौदों या समझौतों पर सहमति प्रदान करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता. नेताजी द्वारा प्रदान किए गए संस्कारों पर ही वे आगे बढ़ रहे हैं.

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