
Noida News: दिल्ली की तरह नोएडा के भी मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन बनने की संभावना बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा अथॉरिटी को मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन में बदलने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अंतिम फैसले के लिए राज्य कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. यह कदम 13 अगस्त, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें कोर्ट ने सरकार से नोएडा अथॉरिटी को भंग करने और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली स्थापित करने पर विचार करने को कहा था. कोर्ट का मानना था कि इससे शहर के निवासियों को ज्यादा फायदा होगा.
क्या था सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर जारी किए थे. एक रिपोर्ट में नोएडा अथॉरिटी के कामकाज में कई गंभीर कमियों को उजागर किया गया था. फैसले कुछ चुनिंदा अधिकारियों के हाथों में केंद्रित थे, भूमि आवंटन नीतियां बिल्डरों के पक्ष में थीं और पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी थी. SIT ने खुद ही मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन बनाने का सुझाव दिया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को SIT रिपोर्ट कैबिनेट के सामने रखने का आदेश दिया ताकि उचित फैसला लिया जा सके.
क्या है मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन?
नोएडा की स्थापना 1976 में उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य भूमि अधिग्रहण, विकास और बिक्री है, न कि नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन, नोएडा देश का एकमात्र प्रमुख शहर है जहां निर्वाचित स्थानीय सरकार नहीं है. अगर मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन बनता है, तो पार्षदों और मेयर के लिए चुनाव होंगे, जो स्वच्छता, सड़कें, पानी और बिजली जैसी नागरिक सेवाओं का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे.
नोएडा के निवासियों ने प्रस्ताव का किया स्वागत
नोएडा के निवासियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है. वे लंबे समय से अथॉरिटी की जगह एक निर्वाचित निकाय की मांग कर रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर RWA (CONRWA) के अध्यक्ष पी.एस. जैन ने कहा कि नोएडा अथॉरिटी का ध्यान औद्योगिक विकास पर है, जबकि नागरिक सुविधाओं की देखभाल के लिए एक अलग निकाय जरूरी है. उन्होंने इस मांग को लेकर सरकार, अथॉरिटी और स्थानीय विधायक को कई पत्र लिखे थे.अगर यह बदलाव संभव नहीं था, तो उन्होंने कम से कम एक अलग नगर निगम विंग बनाने का सुझाव दिया था.
