Budget 2026: बजट में टूटेगी 75 साल पुरानी परंपरा, व‍ित्‍त मंत्री सीतारमण के नाम बनेगा यह र‍िकॉर्ड..

Budget 2026: बजट में टूटेगी 75 साल पुरानी परंपरा, व‍ित्‍त मंत्री सीतारमण के नाम बनेगा यह र‍िकॉर्ड..

Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) कुछ देर बाद लगातार नौंवी बार देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं. इस बार का बजट हर बार के मुकाबले कुछ अलग होने जा रहा है. इस बजट से आम आदमी से लेकर खास तक उम्‍मीद लगाए बैठे हैं. लेक‍िन इस बार एक्‍सपर्ट को टैक्‍स पेयर्स के ल‍िए कुछ बड़ा बदलाव होने की उम्‍मीद कम ही है. इस बार के बजट में बड़ा बदलाव यह है क‍ि बजट भाषण का पार्ट-बी इस बार काफी ड‍िटेल्‍ड और अहम होगा. बजट से जुड़े हर छोटे-बड़े अपडेट के ल‍िए बने रहे जी न्‍यूज के साथ-

टूट रही 75 साल पुरानी परंपरा
आमतौर पर व‍ित्‍त मंत्री पार्ट ए में नीत‍िगत घोषणाएं और आर्थिक योजनाओं पर ज्‍यादा फोकस करती हैं. जबकि पार्ट बी केवल टैक्स से जुड़ी छोटी-मोटी बातों तक ही सीमि‍त रहता था. जी ब‍िजनेस संवाददाता के अनुसार इस बार 75 साल पुरानी परंपरा टूट रही है. दरअसल, इस बार वित्त मंत्री की स्पीच फॉर्मेट बदलने वाला है. ज‍िसमें पार्ट-ए की बजाय पार्ट-बी पर ज्यादा फोकस रहेगा. पार्ट-ए में सरकार की तरफ से आर्थिक स्थिति, फिस्कल डेफिसिट, टैक्स और बड़ी नीतिगत घोषणाओं का ज‍िक्र होता है. वहीं, पार्ट-बी छोटा और सीमित दायरे में रहता है.

व‍िदेशी न‍िवेशकों को भरोसा द‍िलाने की कोश‍िश
पार्ट बी में देश की उन पॉल‍िसी का रोडमैप भी बताया जाएगा, जिनसे आने वाले सालों में तेज रफ्तार बनी रहे. एक सरकारी अधिकारी ने बताया क‍ि इसका एक व्यापक और लॉन्‍ग टर्म विजन रखना है. इसका मसकद व‍िदेशी न‍िवेशकों को यह भरोसा द‍िलाना है क‍ि भारत मजबूत और स्थिर रहने वाला है. अभी दुनियाभर में ज‍ियो-पॉल‍िट‍िकल टेंशन चल रही है, अमेरिका ने टैरिफ बढ़ा द‍िया है. ऐसे में सरकार बजट के जरिए लॉन्‍ग टर्म पॉल‍िसी को लेकर बयान देकर बाहरी इनवेस्‍टर को आकर्षित करना चाहती हैं.

FDI अभी उम्‍मीद से कम आ रहा
हाल ही में पेश इकोनॉमिक सर्वे में भी कहा गया क‍ि निवेश माहौल बेहतर बनाने के लिए संरचनात्मक और चक्रीय दोनों चुनौतियों से निपटना होगा. भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, लगातार ग्रोथ और बड़ा बाजार जैसे फायदे हैं. लेकिन विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) अभी भी संभावनाओं से कम आ रहा है. एक्‍सपर्ट का यह भी कहना है क‍ि पार्ट-बी के बढ़ते महत्‍व के कारण इस बजट पर देश ही नहीं, बल्कि ग्लोबल एक्सपर्ट और पॉलिसी एनाल‍िस्‍ट की नजर रहेगी.

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