
लखनऊः उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल में एक लाख से अधिक लापता लोगों के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईरकोर्ट की लखनऊ बेंच में गुरुवार को सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड के साथ अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी को तलब किया है. गुमशुदा लोगों के मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित विभागों से सभी आंकड़े और रिकॉर्ड तलब किए. मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी.
अगली सुनवाई में डीजीपी को किया तलब
अगली सुनवाई पर अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है. मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर जनहित याचिका दाखिल करने का बुधवार को आदेश दिया था. हाईकोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक दो साल में 108300 लोगों के गुमशुदा होने की बात सामने आई थी. इनमें से मात्र 9700 लोगों को पुलिस तलाश पाई थी. मामले को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका दाखिल करने का आदेश दिया था.
बुधवार को हाईकोर्ट ने दिया था याचिका दायर करने का आदेश
मामले को “प्रदेश में गुमशुदा लोगों के संबंध में” शीर्षक से जनहित याचिका दर्ज करने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था. लखनऊ चिनहट निवासी याची की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था. याची का बेटा जुलाई 2024 को लापता हो गया था. चिनहट थाने में मामले में गुमशुदगी भी दर्ज हुई थी. लेकिन पुलिस की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई. इस पर हाईकोर्ट ने याची की शिकायत के साथ साथ गुमशुदा लोगों की जानकारी तलब की थी. अपर मुख्य सचिव गृह की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 तक 1,08,300 लोग गुमशुदा हुए जिनमें मात्र 9700 लोगों का ही पता चल सका. हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा था कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि गुमशुदा लोगों के संबंध में संबंधित अथॉरिटीज का रवैया हीला हवाली वाला है.
