‘ओ रोमियो’ पर खतरे की तलवार, पिता की छवि खराब करने का आरोप लेकर कोर्ट पहुंचीं सनोबर शेख

‘ओ रोमियो’ पर खतरे की तलवार, पिता की छवि खराब करने का आरोप लेकर कोर्ट पहुंचीं सनोबर शेख

Shahid Kapoor Film O Romeo Controversy: रिलीज से पहले ही शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की अपकमिंग फिल्म ‘ओ रोमियो’ गंभीर विवादों में घिर गई है। 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म पर अब कानूनी संकट खड़ा हो गया है। हुसैन ‘उस्तारा’ शेख की बेटी सनोबर शेख ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका के बाद फिल्म के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

सनोबर शेख का आरोप है कि फिल्म के ट्रेलर में उनके पिता हुसैन ‘उस्तारा’ शेख को गलत और अपमानजनक तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना है कि ट्रेलर में उनके पिता को एक सनकी और गैंगस्टर की तरह दिखाया गया है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। सनोबर के मुताबिक, उनके पिता ने देश, खासकर मुंबई में अपराध पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभाई थी और कई मामलों में पुलिस व खुफिया एजेंसियों की मदद की थी। ऐसे में फिल्म में उनकी छवि को अपराधी के तौर पर दिखाना न सिर्फ गलत है, बल्कि परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।

फिल्म की रिलीज पर लगी तत्काल रोक

याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर फिल्म मौजूदा रूप में रिलीज होती है, तो इससे सनोबर शेख और उनके बच्चों को “अपूरणीय क्षति” पहुंचेगी। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही सनोबर शेख ने पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में उन्होंने फिल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज और पत्रकार-लेखक हुसैन जैदी को पक्षकार बनाया है।

ओ रोमियो पर विवाद

फिल्म ‘ओ रोमियो’ को लेकर विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ से प्रेरित बताई जा रही है। आरोप है कि का किरदार काफी हद तक हुसैन ‘उस्तारा’ शेख के जीवन से मेल खाता है। हालांकि, मेकर्स पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि फिल्म किसी की जीवनी नहीं है, बल्कि एक काल्पनिक कहानी है, जिसमें कुछ वास्तविक घटनाओं से प्रेरणा ली गई है।

फिक्शनल कहानी है ओ रोमियो

इस पूरे विवाद पर फिल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज और लेखक हुसैन जैदी का कहना है कि फिल्म को पूरी तरह से किसी एक व्यक्ति की जिंदगी से जोड़ना गलत है। उनके मुताबिक, एक फिक्शनल कहानी है, जिसे सिनेमाई स्वतंत्रता के तहत बनाया गया है। अब सबकी नजर कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि फिल्म तय तारीख पर रिलीज होगी या फिर इसके रास्ते में कानूनी अड़चनें और बढ़ेंगी।

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