
पश्चिम बंगाल में बीजेपी इस महीने के अंत में अपना चुनावी घोषणापत्र यानी संकल्प पत्र प्रकाशित करने जा रही है. इससे पहले पार्टी ने जनता से सुझाव लेने के लिए रविवार से जिलों में राय संग्रह अभियान शुरू कर दिया है. यह अभियान 18 फरवरी तक चलेगा. इसकी जानकारी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने दी.
शमीक भट्टाचार्य ने बताया कि बीजेपी अपने घोषणापत्र को जनता की राय के आधार पर तैयार करना चाहती है. इसके लिए राज्य के 43 संगठनात्मक जिलों में राय संग्रह अभियान चलाया जा रहा है. पार्टी ने करीब 10 हजार पत्र छपवाए हैं और राज्य के 1,000 प्रमुख स्थानों पर ड्रॉप बॉक्स लगाए गए हैं, जहां लोग अपने सुझाव डाल सकेंगे.
रविवार को बीरभूम जिले के गणपुर में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सभा कर ड्रॉप बॉक्स के जरिए राय संग्रह अभियान की शुरुआत की. उन्होंने कहा,
“इस बार बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर घोषणापत्र नहीं बनाएगी, बल्कि जनता की राय से संकल्प पत्र तैयार किया जाएगा. राज्य के कम से कम एक हजार मंडलों, बड़े हाट-बाजारों, पार्टी कार्यालयों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ये ड्रॉप बॉक्स लगाए गए हैं.” इसी तरह दक्षिण 24 परगना के गोसाबा में दिलीप घोष के कार्यक्रम में भी ड्रॉप बॉक्स रखा गया.
पुरुलिया और दुर्गापुर में भी बीजेपी नेता ड्रॉप बॉक्स लेकर सड़कों पर उतरे. दुर्गापुर पश्चिम से बीजेपी विधायक लक्ष्मण घोड़ुई ने कहा, “हम बंगाल के लोगों से जानना चाहते हैं कि वे राज्य के उद्योग, संस्कृति, रोजगार और विकास को लेकर क्या चाहते हैं. अगले 10 दिनों तक यह अभियान चलेगा और करीब एक हजार ड्रॉप बॉक्स लगाए जाएंगे.”
बीजेपी के इस अभियान पर तृणमूल कांग्रेस ने कटाक्ष किया है. पार्टी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा, “इनके सुझाव बॉक्स गुटबाजी और कलह का तमाशा बनेंगे. जितने बॉक्स होंगे, उतने ही गुट बन जाएंगे.”
दुर्गापुर में तृणमूल विधायक और जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने भी बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, “चुनाव आते ही इनकी नींद खुली है. ये बॉक्स खाली रहेंगे. दुर्गापुर की जनता अब इनका असली चेहरा पहचान चुकी है.”
बीजेपी ने बताया कि ड्रॉप बॉक्स के अलावा QR कोड, ईमेल आईडी और टोल फ्री नंबर के जरिए भी जनता से सुझाव लिए जाएंगे. पार्टी का दावा है कि इस अभियान के जरिए मिले सुझावों के आधार पर ही उसका चुनावी संकल्प पत्र तैयार किया जाएगा. राजनीतिक गलियारों में बीजेपी के इस कदम को आगामी चुनावों से पहले जनता से सीधे जुड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे केवल चुनावी दिखावा बता रहा है.
