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त्वचा से जुड़ी समस्याएं केवल बाहरी नहीं होतीं, ये आपकी इम्यूनिटी, लाइफस्टाइल और मानसिक सेहत से भी गहराई से जुड़ी होती हैं। खुजली, लाल चकत्ते, रूखापन या त्वचा पर मोटी परत जमना अक्सर लोग इन्हें मामूली एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब बात एक्जिमा (Eczema) और सोरायसिस (Psoriasis) जैसी क्रॉनिक स्किन कंडीशन की हो, तो सही समय पर इलाज बेहद जरूरी हो जाता है। दोनों ही बीमारियां लंबे समय तक चल सकती हैं और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन सवाल यह है कि इनमें से ज़्यादा खतरनाक कौन है। नई दिल्ली स्थित स्वस्तम वेलनेस स्किन क्लिनिक में त्वचा रोग विशेषज्ञ, डॉ. निहारिका गोयल बता रही हैं दोनों में कौन सी स्किन कंडीशन ज़्यादा खराब होती है?
एक्जिमा और सोरायसिस होने पर क्या होता है?
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एक्जिमा: एक्जिमा, आमतौर पर खुजली, सूखापन, लालिमा और त्वचा में सूजन के रूप में दिखता है और बच्चों में अधिक पाया जाता है; यह संक्रामक नहीं होता, पर लगातार खुजलाने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। वहीं सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम त्वचा की कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने के लिए ट्रिगर करती है; इसका सबसे आम रूप Plaque psoriasis है, जिसमें मोटी, पपड़ीदार लाल पट्टियाँ बनती हैं।
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सोरायसिस: सोरायसिस एक पुरानी ऑटोइम्यून त्वचा स्थिति है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली की खराबी के कारण त्वचा कोशिकाएं तेजी से विकसित होकर लाल, खुजलीदार और पपड़ीदार धब्बे बनाती हैं। इसके गंभीर मामलों में जोड़ों में दर्द और सूजन भी हो सकता है, इसलिए कुछ मामलों में यह अधिक जटिल माना जाता है।
क्या हैं बचाव के उपाय?
इसी बचाव के लिए विशेषज्ञ नियमित मॉइश्चराइज़र का उपयोग, माइल्ड साबुन, तनाव कम करना, ट्रिगर (धूल, एलर्जी, बहुत ठंडा या सूखा मौसम) से बचना, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद की सलाह देते हैं। धूम्रपान और शराब से दूरी भी फायदेमंद है। किसी भी स्थिति में बार-बार फ्लेयर-अप, पस, तेज दर्द या जोड़ों की समस्या हो तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, ताकि सही दवा जैसे टॉपिकल स्टेरॉयड, इम्यूनोमॉड्यूलेटर या आवश्यकता पड़ने पर बायोलॉजिक्स समय पर शुरू की जा सके।
साथ ही, किसी भी नई क्रीम या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट ज़रूर करें ताकि एलर्जी का खतरा कम हो। नियमित फॉलो-अप से दवाओं के साइड इफेक्ट्स पर निगरानी रखी जा सकती है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं में उपचार हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Satya Report किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
