
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर में एक शख्स के अंतिम संस्कार के दौरान अनोखा नजारा देखा गया. यहां 97 साल के मांगीलाल सैनी को उनके दोस्तों ने अनोखे अंदाज में अंतिम विदाई दी. मृत शख्स के दोस्तों ने अंतिम संस्कार के बाद शमशान घाट में ही ताश की बाजी खेली गई. सुनने में यह थोड़ा सा अजीब लग रहा होगा, लेकिन जो लोग मांगीलाल सैनी को जानते थे, वे कहते हैं कि उनके लिए इससे बेहतर श्रद्धांजलि हो ही नहीं सकती थी.
दरअसल, हनुमानगढ़ जिले के नोहर में एक वृद्ध के अंतिम संस्कार के बाद अनोखा नजारा देखने को मिला. यहां श्मशान घाट में 97 वर्षीय वृद्ध मांगीलाल सैनी के अंतिम संस्कार के बाद उनके साथियों ने शमशान घाट में ताश की बाजी खेली. मृतक मांगीलाल ताश के शौकीन थे और ताश खेलते समय ही उनका निधन हुआ था, जिसके बाद आज नोहर के शमशान घाट में मांगीलाल सैनी का अंतिम संस्कार किया गया और अंतिम संस्कार के बाद मांगीलाल के साथियों ने शमशान घाट में ताश की बाजी खेल कर उनको श्रद्धांजलि दी.
अंतिम संस्कार के बाद दोस्तों ने दी अनोखी विदाई
अंतिम संस्कार के बाद सभी लोग शमशान घाट पर बैठे थे. इस दौरान मृतक मांगीलाल के साथियों ने फैसला किया कि उनको उसी अंदाज में याद किया जाए, जैसा उन्हें पसंद था. शमशान घाट पर ही उनके साथियों ने ताश की गड्डी खोली. कुछ देर के लिए सबने बाजी लगाई. कोई शोर नहीं, कोई हंसी मजाक नहीं, बस चुपचाप खेल खेल रहे थे. मृत के साथियों ने कहा कि यह खेल नहीं है, बल्कि अपने दोस्त को आखिरी सलाम है.
इलाके में बना चर्चा का विषय
वहीं एक मृत शख्स को इस तरह दी गई अनोखी श्रद्धांजलि पूरे नोहर में चर्चा का विषय बन गई. वहीं कुछ लोगों ने इस मृतक प्रति गहरा भावनात्मक लगाव बताया, तो कुछ इसे दोस्ती की मिसाल बता रहे हैं. हालांकि शमशान घाट पर मृतक के परिजनों ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई. उनका कहना है कि मांगीलाल सैनी को ताश से बहुत लगाव था. अगर उनके दोस्त ताश खेलकर उन्हें याद कर रहे हैं तो इसमें कुछ बुरा नहीं है.
