
अगर आप सालाना 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा कमाते हैं, तो सावधान हो जाइए. इनकम टैक्स विभाग ऐसे लोगों को बड़े पैमाने पर नोटिस भेज रहा है. वजह है डिडक्शन और छूट (एक्जेम्प्शन) में गड़बड़ी.
टैक्स सलाह देने वाले प्लेटफॉर्म TaxBuddy ने X पर एक मामला शेयर किया, जिसमें 10.65 लाख रुपये की गलत कटौती का दावा करने पर 3.14 लाख रुपये का अतिरिक्त टैक्स लगा और उस पर 200% का जुर्माना यानी 6.29 लाख रुपये ठोक दिया गया. कुल मिलाकर 9.44 लाख रुपये भरने पड़े.
क्यों बढ़ी सख्ती?
अब टैक्स विभाग एडवांस टेक्नोलॉजी और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. आपका ITR अब Form 16, कंपनी की जानकारी, बैंक और अन्य फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से मैच किया जाता है. पहले जो छोटी-मोटी गड़बड़ियां बच जाती थीं, अब तुरंत पकड़ में आ रही हैं. सरकार का फोकस टैक्स बेस बढ़ाने और सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर है. ज्यादा कमाई करने वालों पर खास नजर रखी जा रही है, क्योंकि उनसे ज्यादा राजस्व मिलने की संभावना होती है.
क्या करें टैक्सपेयर्स?
अगर आपने बड़ी कटौती क्लेम की है, तो तुरंत अपना रिटर्न चेक करें.
Form 16, HRA रसीद, LTA, 80C और 80D के निवेश के सबूत मिलान करें. हर क्लेम का सही डॉक्यूमेंट होना जरूरी है.
रिवाइज्ड रिटर्न या ITR-U?
रिवाइज्ड रिटर्न भरने की समय सीमा सीमित होती है. अगर वह समय निकल चुका है, तो Updated Return यानी ITR-U का विकल्प है. ITR-U से आप असेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीने तक गलती सुधार सकते हैं. लेकिन इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है. देरी जितनी ज्यादा, अतिरिक्त बोझ उतना ज्यादा. ध्यान रखें, ITR-U का इस्तेमाल टैक्स घटाने या ज्यादा रिफंड लेने के लिए नहीं किया जा सकता. यह सिर्फ कम बताई गई आय या गलत क्लेम सुधारने के लिए है.
आखिर में
आज के डेटा-आधारित टैक्स सिस्टम में गलतियां छिपती नहीं हैं. नोटिस का इंतजार करने से बेहतर है खुद जांच कर समय रहते सुधार कर लें. वरना छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक झटका दे सकती है.
